Wednesday, March 6, 2013

दास्ताँ



आरजू थी, मोहब्बत का पैगाम लिखेंगे ;
तन्हाई मे कैसे गुजरी रात वो दास्ताँ लिखेंगे !

साजन 

पन्हा



निद्राहीन आँखें,आँखों की पुतलियों मे नींद जागे !
भटकी हुई रुहु की माफीक प्यार  की पन्हा मागें |

सजन

अल्फाज



तमाम रातें  सजी हुयी छोटी बढ़ी ख़यालों से
दर्द से गर्क़, दहन से सुर्ख, हर अल्फाज सजा के ;

सजन

अफ़सोस



कत्तल भी हो जायें,  रजो-गम नहीं,   दीदार तो होता है ,
अफ़सोस किसी भी दौर का नहीं,यादें दीदार की महफूज है ;

सजन

पर्दा-नशीं



पर्दा-नशीं थे नहीं वह, हुश्न की चर्चा सरे बाजार होती है ;
सरेआम महफील मे उनका जलवा कत्ले-आम मचाता है !

सजन

नफरत



नफरत न होना बुज़दिली की बात नहीं, न है कोई शिकवा वेबफाई से,
मालूम मुझे खोखली दीवाल पर टीका यह बेरुखी का किल्ला वहम से ,

सजन 

मोजुदगी



मोजुदगी नहीं, होने का एहसास ही  खास है ;
दिल की नजर से देखिये, हम आपके पास है

सजन

बे-वजह



बेवजह कोई बैठे-बिठाये लब पे याद आये  ;
याद सताये पर दूर तलक ना हो, दिलवर है |

सजन

पैमाना



हर पैमाने पे ज़िन्दगी बोझ लगे तो मायुसी ही  है ;
ज़िन्दगी अलग से  ख़ुशनुमा लगे तो ज़िन्दगी  है |

सजन

माशुकी



अनकहे जज्ब़ात के हर लफ्जों से प्यार  है ;
जज्ब़ात मे बह कर एतवार मे माशुकी  है |

सजन

दिल की आवाज़



छोड़ चले  गये हो पर दिल से गये  नहीं   ;
गौर से सुने दिल मे हरदम गुनगुनाते वही |

सजन 

शमा



तेरा प्यार शमा बनके मेरी   दुनिया रोशन करता है,
ख़्वाब की मानिंद हर वक़्त मेरे   दिमाग में रहता है.

सजन

बहकना



लोग सही कहते,इस उम्र मे भी;
बहकते हम गजरे की महक से,
                             पूछेंगे उनसे जरा,पता तो चले भी,
                             उम्र का क्या तक़ाज़ा बहकने से ।

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सूरत




पत्थरों को तराश के बनती हसीन मूरत!
दिल को तराश कर सजाई थी तेरी सूरत ।

सजन

एतराज़



मैं तेरे हुश्न के गरूर से नशा किया, एतराज़ न जाने तूने क्यों किया,
तुझ पर एतवार करके, ग़म का, ज़िन्दगी भर दिल पर ज़ख्म लिया,

सजन

नशा



नशा छोडा,तुम छोड़ गई ,सोचते तुम लोटोगी,जो नशा लोटा दिया,
हम पीते नहीं जानम, वक़्त तुम्हारे इन्तज़ार का, यों ही हल्का किया |

सजन

उलहाना



तेरी आँखों से नफ़रत का उलहाना,हर बाज़ी को डुबो दिया
शराब की थी नहीं इतनी औकात,तुम ने ही मदहोश कर दिया,

सजन

तस्वीर



तस्वीर थामनी होगी ;तस्वीर मिटाने से पहले,
वफाई जताना है ज़रूरी,
वेवफाई बताने से पहले,

बिज़ली




बिज़ली सी कोंध जाती, अन्धेरी रात के सन्नाटे मे,
हुस्न का "ज़लवा", ज्वालामुखी सा फ़ुटता मन मे !

सजन

उमीद



उमीदों के बादल उड़ गये, हव़ा ने दिशा बदल दी ,
एक "ना" से उन्होंने  पूरी   कहानी ही बदल दी ;

सजन

बेज़ान पत्थर



प्यार जताने, पत्थर पर उनके साथ नाम जोड़कर लिखा था,
बेज़ान पत्थर पर यों क्यों वक्त जाया क़रते,हमे क्या पता था,

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पैगाम



कई कई शाम उनके नाम हम ने,कई कई पैगाम लिखे थे,
कसमे ,वादे,इज़हार किया था उम्र भर का साथ निभायेगें।

सजन

आँखों के नूर



क्या जाने क्या बात हुई,गुँजन सारे,बेज़ूवान हुवे ;
आँखों के नूर,अब उनकी आखों मे ही खटकने लगे !

सजन

जिन्दगी



लम्बी जिन्दगी की दुआ जब मुझे मिले
सोच मे भीषण  बवंडर आये होले -होले
जिन्दगी अब कांह जीते,यों ही  काट रहे
जिसे काटना है,उसे फ़िर लम्बा क्यों खींचे

सजन

ख्वाइस



प्यार होता कियूं ? बात है समझने की,
तभी तो  प्यार की ख्वाइस है मेरी भी |

सजन

रोना



तुमको कभी रोना आया नहीं - दर्द से
प्यार "प्यार" नहीं जो गुजरा नहीं दिल से

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तन्हा




तूम ग़ैर की हो जाये तो शकुन पाये हम,
तन्हा होने का दर्द, वो जाने दिल हो जिन में,

सजन 

बियोग




बियोग कि आग, बर्फ बनके, चोट पर लगा रही मरहम !
अन्दर पिघल रही बर्फ, अश्क बन, बहती रहती है हरदम |

सजन 

"हमदर्द"



दर्द बहूत था दिल में, लेकिन मिला प्यार से
प्यार नहीं, आपका दर्द- "हमदर्द" है, हम से

सजन

हालात



अजीब हालात है, अब हम मयखाने से भी लोटा दिये जाते हैं,
इल्जाम पीनेवालों का,मेरे गम,उन्हें पुरी बोतल से नशा नहीं देता !!

सजन

बे-दिल



दिल नहीं जिन के पास, वह दिल का हल क्या जाने,
मोहब्बत है, इब्बादत है, मौत से डरते नहीं परवाने,

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मायूसी



अश्क दिखता मेरी मायूसी का उनके चहरे पे,
दिल की बात, कहती सब बेजूवान आँखों से,

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यादें



याद को भी दुश्मनी,धधकती रहे हरदम;
कोई भी आंसू न बुझा पाये खुदा कसम |

सजन

इकरार और प्यार



आँखों से जो टपकते अश्क तो बूंद-बूंद से इकरार  होता  है ;
होंटो पर चमचमाती हंसी, सितारों से रोशन प्यार  होता है |

सजन

आशियाना



हद हो गई, बहुत हुवा आशियाना, सोचा उन्हें अब भुला देंगे,
पर जब सामने से गुजर गये, सोचा  कल होगा दिन आख़री ;

सजन

दास्ताँ



आरजू थी, मोहब्बत का पैगाम लिखेंगे ;
तन्हाई मे कैसे गुजरी रात वो दास्ताँ लिखेंगे !

साजन 

पन्हा



निद्राहीन आँखें ,आँखों की पुतलियों मे नींद जागे !
भटकी हुई रुहु की माफीक प्यार  की पन्हा मागें |

सजन

अल्फाज



तमाम रातें ख़यालों से सजी हुयी छोटी बढ़ी बातें,
दर्द से गर्क़, दहन से सुर्ख, हर अल्फाज सजा के ;

सजन

अफ़सोस



कत्तल भी हो जायें,  रजो-गम नहीं,   दीदार तो होता है ,
अफ़सोस किसी भी दौर का नहीं,यादें दीदार की महफूज है ;

सजन

पाषाण मूर्ती !!

पाषाण मूर्ती !!

क्यों किसी कारीगर के  चिंतन को,
तेरा ही चेहरा मिला पत्थरों के लिये,
कैसे? पर्दा उठाना है इस रहस्य से,
कब तक नाइका की भांति रहस्य मइ,
सिमटी रहोगी तुम लेकर वैभव कांति!
बनानेवाले के आंखों का पानी,
अंत:सलिला की तरह,अन्दर ही,
मन को गीला करता,तेरे लाब्यन को,
रंजित करता,शुष्क नयनो से ।
मुख की मूकता, ह्रदय की धड़कन को,
अनसुना सा, धमनियों से लहू निचोड़कर,
रूपित करता,शीलाओं को काटकर,
क्या बंजर हो गया था शिल्पी का मन;
खतरा उठा रहे थे पत्थर को तरासने की,
या रोपण कर रहे थे भविष्य चित्रण का!
तुमने कुछ कहा नहीं, कुछ कहती नहीं?
तुम्हारे कान सुन भी सकते, तो सुनो भी;
बस खड़ी रहती हो, कुछ बोलो,बताओ भी;
मैं अकेला नहीं तैयार,दुनिया चाहती सुनना!
कब तक रहोगी पाषाण,सजीब मुरत बनकर,
निश्चुप,स्तब्द,पाषाण मूर्ती ?


सजन कुमार मुरारका

हकीकत



हुश्न का सहेरा समझा; बादल समझ इतराये  ;
हकीकत मे यह मेरे "जलते" दिल का धुंवा था , !

सजन

लब



लबों पर था नाम तुम्हारा, मेरे लबों पर नाम है तुम्हारा ;
हिफ़ाजत से दिल मे था,हिफ़ाजत से रखने का दिल मेरा !

सजन

महबूब



महबूब को पाकर, ख़ुशी मे ज़िन्दा थे बेमिसाल,
उनको खोकर भी ज़िन्दा हैं लाश सारीका  हाल|

सजन

आदत



हर-रोज़ मिलने की आदत से,
न मिलने का यह वीरान सा सफ़र,
ख्वाहिश है,अगर ना मिली तो,
खत्म कर दूँ ज़िन्दगी का सफ़र !

सजन

फरियाद



हम ना रहे, पर हमे याद मे रहने की चाहत है !
फरियाद करेंगे वह किस से, जब दिल टूटता है ,

सजन

औकात



किसी के दर्द को बांटना हो तो,दिल मे उतर कर देखो,
भर के बांहों मे,उसकी आँखों मे खुद की औकात देखो|

सजन

"दर्द"का रिश्ता



तुम्हारी आँखें समझती थीं "दर्द",
मेरा भी एक रिश्ता ऐसा !
तुम्हारी नफ़रत का दर्द,"
दर्द" से मेरा रिश्ता भी एक ऐसा !

सजन

मोहब्बत का पैमाना



मोहब्बत को रब जाना , प्रेम-प्यार को इबादत माना ;
मुस्कराहट पर मर मिटते,हर लहज़ा था मीठा-सुहाना !

सजन

ज़लवा



हुश्न के ज़लवे पर इतना न तुम  इतराव !
चमक दो दिन की,वक़्त रहते संभल जाव|

सजन

प्यार का मंज़र!



अफ़साना यह रहता है,हर तरफ़ प्यार का मंज़र दिखा ;
फूलों से लदी हर शाख मे, मोहब्बत का वास्ता  दिखा !

सजन

जीने का बहाना



प्यार अगर मिलता तो,जीयें मशगुल होकर.
दर्द मिला,  तभी जीते प्यार को याद कर |

सजन

Monday, February 18, 2013

जीने का सहारा



तब रात की तन्हाई में याद करता था
अब रात की तन्हाई में याद करते हैं
तब तेरी यादें  मेरे जीने का सहारा था
अब तेरी यादें  मेरे जीने का सहारा हैं

सजन

बेरुखी



खुद की बेरुखी पर
     वह अगर एक बूंद आंसू बहाते
कसम खुदा की
   हम गम का सागर पी जाते

सजन

तोउफा दर्द का!



दर्द को ना देखिये , उल्फत की नज़र से,
स्वीकारा इसको हमने तोउफा समझ आपसे;

सजन

चाहत



मरना चाहे इस लिये,
उनके दिल से गिर गये ;
जिन्दा हूँ की हमें फिर से,
दिल मे ज़गह मिल जाये !

सजन

कातिल



कातिलाना मुस्कान अधरों मे,हंसी,उनके चहरे पर ,
देख हाल हमारा," खुशी"छुपती नहीं,जल्लादी शान ;

सजन

शिकवा



यकीनन जीने को जी लेते,महफूज अगर रहें उनके इरादे,
नफरत मे भी डर है,शिकवा करेंगे,  हम तब्बजो नहीं देते !!

सजन

गम के आंसू



गम के आंसू पी-पीकर, गम ही हम से पनाह मांगें जालिम !
हमारी दास्ताँ सुन, मयखाने मे प्यालों पर प्याले भरें जाते हैं...!

सजन

ख्वाब



सोचते हैं, ख्वाब में भी दूर रहेंगे तुम से !
पर नींद नहीं आती बिन तुम्हारे  ख्वाब के ,

सजन

नज्म



प्यार की नज्म मगर जाने-
क्यूँ लाख कोशिश से भी न लिख पाते हैं ?
लगता है फुल पे मंडराती तितली
पकड़ते-पकड़ते उंगली से छुट जाती है!!

सजन

दर्द



बंद कर लेते अपने होंट,
मगर दिल से दर्द है निकला ;

सजन

परछाई



फुर्सत नहीं,जरुरत नहीं, न इमान भी,
किसी और को पाने की ;
तुम रहते हो हरवक्त साथ,
देख लेते हैं तुम्हे अपनी परछाई मे,

सजन

तन्हाई की रात



अकेला सा महसूस करता तन्हाई रातों मे,
याद तुम्हे कर लेता हूँ;
हर लम्हा खुद-ब-खुद आबाद होता,
हुजूम निकलता लाखों चाँद-सितारों का|

सजन

Sunday, February 17, 2013

भेंट



भेंट क्या करें तुम  को फूलों का गुलिस्ता या  खिलते गुलाब की कली
तोहींन हमारी,खुद गुलिस्ता या खुद गुलाब है जो,वही उन्हें देने की...

सजन

हाल परवाने सा


हाल परवाने सा, शंमा रोशन हुई,
खींचे चले आते,पता अन्जाम मिलन का :
हम तो जीते जी मर गये हैं मजबूर-नाकारा
सांसे चलती आपके साहरे,  !!

सजन

दीवाना



पंखुढ़ियों मे फँस, अदाओं से बेहाल,हो कर परेशान;
दीवाना बन,काँटों के जखम लिये, अश्क भीगे नयन;

सजन

कातिल



कातिलाना मुस्कान अधरों मे,हंसी,उनके चहरे पर ,
देख हाल हमारा," खुशी"छुपती नहीं,जल्लादी शान ;

सजन

" चाँद "



"उनके " हुश्न से उस चाँद को मिलाना ही गैरवाजिब था,
 मेरे " चाँद " से बाहर आसमां का खुद ही शरमा गया !

सजन

शिकवा



यकीनन जीने को जी लेते,महफूज अगर रहें उनके इरादे,
नफरत मे भी डर है,शिकवा करेंगे,  हम तब्बजो नहीं देते !!

सजन

गम के आंसू



गम के आंसू पी-पीकर, गम ही हम से पनाह मांगें जालिम !
हमारी दास्ताँ सुन, मयखाने मे प्यालों पर प्याले भरें जाते हैं...!

सजन

ख्वाब



सोचते हैं, ख्वाब में भी दूर रहेंगे तुम से !
पर नींद नहीं आती बिन तुम्हारे  ख्वाब के ,

सजन

आईना


आईने जैसी नजाकत है हमारी भी सनम,
ठेस हलकी सी लगे तो देर नहीं चटकने में !

सजन

नज्म



प्यार की नज्म मगर जाने-
क्यूँ लाख कोशिश से भी न लिख पाते हैं ?
लगता है फुल पे मंडराती तितली
पकड़ते-पकड़ते उंगली से छुट जाती है!!

सजन

वक़त



कहते जो हमारे लिये उनके पास वक़्त नहीं है ;
खोजेंगे हमे,वक़त आने पर,यह हमारा वादा है !

सजन

सादगी




मासूमियत की सादगी से, वह जहेन में फरेब का नश्तर चलाती ,
मुहब्बत की सर्द चट्टानों को पिघला कर आग का समंदर बनाती ;

सजन

शोख़ी



मेरे दिलवर की शोख़ी,खिलती कलियों की नक्श- पहचान है,
रहम-ऐ-अदब का तकाजा, उनकी सादगी कलियों को बख्शा है ;

सजन

दीदार



कत्तल भी हो जायें,  रजो-गम नहीं,   दीदार तो होता है ,
अफ़सोस किसी भी दौर का नहीं,यादें दीदार की महफूज है ;

सजन

यादे



कितने अर्स काबीज रखेगी वह जिद्द,
खुद के बेकाबू दिल की धढ़कन पे ,
हमारी भी जिद्द है, मरते दम तक,
यों ही धढ़के- यादे बन उन के दिल मे |

सजन

मासूमियत



मासूमियत की सादगी से, वह जहेन में,
 फरेब का नश्तर चलाती ,
मुहब्बत की सर्द चट्टानों को पिघला कर.
 आग का समंदर बनाती ;

सजन

हुश्न

पर्दा-नशीं थे नहीं वह,
हुश्न की चर्चा सरे बाजार होती है ;
सरेआम महफील मे,
उनका जलवा कत्ले-आम मचाता है !

सजन

दर्द



बंद कर लेते अपने होंट,
मगर दिल से दर्द है निकला ;
खुदा का शुक्र है !
अभी तल्लक मेरा जनाजा न निकला |

सजन

परछाई



फुर्सत नहीं,जरुरत नहीं, न इमान भी,
किसी और को पाने की ;
तुम रहते हो हरवक्त साथ,
देख लेते हैं तुम्हे अपनी परछाई मे,

सजन

तन्हाई की रात



अकेला सा महसूस करता तन्हाई रातों मे,
याद तुम्हे कर लेता हूँ;
हर लम्हा खुद-ब-खुद आबाद होता,
हुजूम निकलता लाखों चाँद-सितारों का|

सजन

दिल ने लिखा



समुन्दर की रेत पर लिखा,
लहरें आई और धो गई;
रेत का दोष इसमे कैसे,
दिल ने ग़लत जगह लिख था।


सजन

टुटा दिल


कभी  किसी का दिल
दियो ना अकारण दुखाय ,
मन टूटे  एक बार,
लाख यत्न करे जुड़  न पाय,


सजन

मोहब्बत


मोहब्बतकी आयतों को सनम,
ख़ुदा-ऐ पाक का दर्ज़ा दिया |
फिर भी नजरें न हुई इनायत,
हमने ग़म से दामन जोड़ लिया,

सजन

जज़्बात


मेरे जज़्बात की कद्र कंहा,
हर रोज़ यों ही दम तोड़ते;
परवाह भला उन्हें क्यों,
वह तो मोहब्बत का कारोबार करते।

सजन

आसूं



आसूं  की बात क्या,  ग़म मे ही तो  बहते,
ख़ुशी के लम्हों मे भी आंसू निकल आते।

सजन

चाहत



बड़ी मुद्द्त से चाह थी कोई दिलरुबा मिले;
मिले भी तो सनम,बड़े ही वह  बेवफा  मिले !

सजन

ज़ख़्म

खंज़र से लगा ज़ख्म फिर भी भर जाता;
ज़ुबां से लगा ज़ख़्म कभी भर नहीं पाता|

सजन

इंतज़ार



दिन गुज़ारते उम्मीद से ,रातें गुज़रेगी ख्यालों मे,
रातें नहीं गुजरती ख्यालों से,इंतज़ार के लम्हों मे|

सजन

गजरा



गजरा सजाया आपने मगर;
खुशबू फ़ैली देर तक,
                      हर दिल मे जंवा सा असर ,
                      चाहत जवां होती रही दुर तक ।

सजन

आरजू


किसी के दिल में पनाह पाये,यह हमारी आरजू है ;
किसी के होंटों की मुस्कुराहट बने यह अरमान है ;

सजन

नजदीकीयां !



नजदीकीयां दिल कि,
दिल का हिस्सा बनी|
दिल से चाहे हटाना,
दिल को होगा मिटाना|

:सजन

नज़र


 
नज़र मिले,नज़रें बचाकर,
नज़रें चुराकर करे इशारा,
नज़रें उठाये,नज़रें गिराये,
नज़रोंसे प्यार क खेल सारा;


सजन

साथ बीते पल



वह लम्हा खोना नहीं चाहते
जब तुम्हारा साथ था ;
यह लम्हा जीना नहीं चाहते
जब तुम्हारा साथ छुटा !


सजन

दिल की कहानी



प्यारके हर पल मे,
उनकी कहानी लिखी थी;
दिल के कागज़ पर,
पुरी ज़िन्दगानी लिखी थी,


सजन

मिलन


मिलके,ज़ुदा हो गये खुदसे,
हुस्नसे नहीं,तुमसे था प्यार;
दिल ने कहा वेवफा दिल से
अभी तो बाकी है दीदार !

सजन

इश्क छुपता नहीं

इश्क छुपता नहीं !

प्रिये! तुम्हारे निभाने की यह रीत है क्या ?
प्यार किया, गुनाह नहीं, फिर डर है क्या ?

वेरुखी की  फ़ितरत मन मे है अगर  जुदा ;
जानम! कहते, इश्क कभी कंहा  है छुपता !

आपने  जनाव ! यह बात छिपा रखी थी,
लाख छिपाये, चहेरे पर बात आ रही थी;

चाहे जो यत्न करे, सच्चाई तो छुपती नहीं ;
छुपाओ चाहे गुलाब को,खुश्बू छुपती नहीं  ।

इन्कार करने की इतनी सी वज़ह है अगर,
जताना न था तो  कोइ शिकवा नहीं मगर,

यह खबर तो सरेआम सबको खबर हो गई,
आप इतने भी नादान नहीं, बेखबर रह गई;

यह नजदीकीयां, नजदीक है दिल के  इतनी,
दूरियाँ चाहे बनाना, दूरियाँ होती कंहा अपनी|

सजन कुमार मुरारका 

औरत

औरत 

खुदा का नक्शा औरत, लाजवाव,बेमिशाल,बेहिसाब  ;
अदायें,नखरे,नज़ाकत,ज़लवा,किसी को रूप का शबाव .

जग़ मे भेजा तितलियों को रस,रंग,माधुर्य से भरा नकाव,
कत्लेआम मचाये बिन हथियार,दिखाये झूटे-सच्चे ख्वाब,

दिमाग पर नशा सा ,मन भ्रमित सा,दिल का नहीं जवाब,
उम्र का तक़ाज़ा,बिन उम्र के लिहाज़,आदतन जैसी शराब;

कुछको शौख़, कुछ की बेबसी पीना, कुछ पीके बदहवाश,
उनके  ज़िस्मानी  नुमाइश से इमान खोता  होश-हवाश;

नागीन सी बल खाये,नीली आँखों में डुबाये,दिल नादान,
जिसमें जितनी प्यास भड़की,पाने को उतना ही परेशान;

नज़रों से बचे, नज़रें मिलाकर,नज़रें चुराकर करे इशारा,
नज़रों से गिरे,नज़रें उठाये,नज़र से नज़र का खेल सारा;

खुदा तुम्हे नहीं लगता की सृष्टी को चलाने बनाई औरत,
मेरे मोल्ला ! औरत अक्सर कैसे बन जाती है  कयामत,

औरत को क्या कहे जीने का मकसद,या मौत का सामान;
माता,बहन,पत्नी,रिश्तों की बात छोडें,दिखे भोग समाधान;

ईश्वर ने सृष्टी का भार हटाने रची थी शायद औरत की रचना,
कामिनी,कोमल,सहज़,सरल,निर्मल ह्रदय,रस, कृपा-करुना ;

सजन कुमार मुरारका 

मन की भूख !

मन की भूख  !

कवि,तुम जो लिखते हो ,
सोच के सागर मे;
कई कई बार,
पहले डुबकी लगाकर!
भावनाओं के मोती,
या गहराई से,
जलज़-सिक्त;
धुली हुई मिट्टी,
उठाकर या बटोरकर;
रूप देते !
मासूम चुलबुला शैशव;
पल्लवित किशोर अवस्था,
उतेज़ित यौवन ,
झुरियों भरी अधेड़ उम्र,
और थका-हारा वार्धक्य;
हर तरह का वर्णन!

प्रेम-वियोग,सुख-दु:ख,
बन्ध आँखों से,
उखड्ती साँस,असहाय दर्द;
लहु को करे सर्द या ज़ोशीला;
दिल दहलानेवाली बात;
लिखते तुम,लिख सकते !
परन्तु! लिखते ही क्यों ?
मैं सोचता-"भूख"के कारण"!
रोटी,कपड़ा,मकान,
यश,प्रतिष्ठा,मान-सन्मान,
व्यवस्था,अव्यवस्था के दंशन;
नीति-अनीति के कथन,
कहे-अनकहे वचन,
जो शब्द नहीं:-
सिर्फ़"भूख"के प्रतिफलन |
हम सब भूखें,भूख मिटाने,
कविता लिखते हैं,
पर यह पेट नहीं भरता !
सिर्फ भरे दिमाग और मन |

सजन कुमार मुरारका